Friday, 27 January 2012

betiyon ke liye

वैसे तो अवसर बहुत खास था, 
किन्तु हर चेहरा उदास था, 
बाग में फूल नया आया था,
उसका आगम माली को नहीं भाया था,
घर में ख़ामोशी छाई थी,
होंठों पर झूठी बधाई थी, 
सबका चेहरा अजीब सा बना था,
पता है क्यूँ ?- पता है क्यूँ ?
क्यूँ कि –
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.

मुश्किल


मुश्किल नहीं है
हवा के खिलाफ चलना,
बहना धरा के विरुद्ध,
नाही मुश्किल है समर्पण,
मार लेना इच्छाओं को भी 
मुश्किल नही है,
मुश्किल है---
मुश्किल है परम्पराओं को तोडना,
रीतियों की अवहेलना- मुश्किल है,
मुश्किल है ठहराव को तोडना 
बहना नयी दिशा में -मुश्किल है,
मुश्किल है  सही  को सही कहना ,
झूट को नकारना -मुश्किल है,
मुश्किल है साहस बटोरना
लड़ना हक़ के लिए -मुश्किल है...

दोहे

जहाँ भूख की आग में जलता हो इंसान,
नारा वहीं बुलंद है मेरा देश महान||




अर्थनीति और राजनीति का मिला हुआ यह तंत्र,
ना बाक़ी अब गण रहा- ना बाक़ी गणतंत्र ||


जीवन में उनके कभी रहता नहीं विषाद.
गौरव जिनके साथ हो माँ का आशीर्वाद ||