वैसे तो अवसर बहुत खास था,
किन्तु हर चेहरा उदास था,
बाग में फूल नया आया था,
उसका आगम माली को नहीं भाया था,
घर में ख़ामोशी छाई थी,
होंठों पर झूठी बधाई थी,
सबका चेहरा अजीब सा बना था,
पता है क्यूँ ?- पता है क्यूँ ?
क्यूँ कि –
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.
किन्तु हर चेहरा उदास था,
बाग में फूल नया आया था,
उसका आगम माली को नहीं भाया था,
घर में ख़ामोशी छाई थी,
होंठों पर झूठी बधाई थी,
सबका चेहरा अजीब सा बना था,
पता है क्यूँ ?- पता है क्यूँ ?
क्यूँ कि –
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.
बहू ने बेटी को जना था.