Saturday, 17 September 2011

चंद शेर .........................

बुजर्गो को हिकारत की नजर से देखने वाले,
कभी औलाद वाले वो भी होंगे भूल जाते है |

जो जागी अनगिनत राते की बेटा चैन से सोये, 
वही जब खांसती है तो, बेटा चीख पड़ता है |

जो ओहदेदार होकर भी करें इंसानियत की बात, 
बुलंदी ऐसे ही कदमो में अपना सर झुकाती है |

जिसने बच्चों की खातिर रखे हो बेवजह रोज़े, 
उसे खाने को मिलती है, बासी बची रोटी |

बुजर्गो को हिकारत की नजर से देखने वाले....
कभी औलाद वाले वो भी होंगे भूल जाते है ......."साहिल"