बुजर्गो को हिकारत की नजर से देखने वाले,
कभी औलाद वाले वो भी होंगे भूल जाते है |
जो जागी अनगिनत राते की बेटा चैन से सोये,
वही जब खांसती है तो, बेटा चीख पड़ता है |
जो ओहदेदार होकर भी करें इंसानियत की बात,
बुलंदी ऐसे ही कदमो में अपना सर झुकाती है |
जिसने बच्चों की खातिर रखे हो बेवजह रोज़े,
उसे खाने को मिलती है, बासी बची रोटी |
बुजर्गो को हिकारत की नजर से देखने वाले....
कभी औलाद वाले वो भी होंगे भूल जाते है ......."साहिल"